आज के कर्णधार

आज के कर्णधार

युवा तुम हो
आज के कर्णधार
तुम पर टिकी हैं
देश का पतवार।
करो कोशिश -सदा
न कभी हारो
मचा दो
अपने कर्मों से हाहाकार
समय को यूँ ही
न जाने दो बेकार
फैला दो अपना यश
ताकि गूँज उठे संसार।

बताओ तो जरा
कहाँ से ये उठा है धुआं
कहीं घना कोहरा तो नहीं
गरीबी के पीठ पर पड़ा मार
कहीं दोहरा तो नहीं
ये जो कोहराम मचा है- दुनिया में
सुनने वाले कहीं बहरा तो नहीं
चलो युवा शक्ति
लगा अपनी ताकत
फैले हुए आताताइयों के विषाक्त जहर को काटने में
बरपा दो कहर
ताकि गूँज उठे- हर गाँव,नगर और शहर
उखाड़ फेंको अविश्वास का पोस्टर
जो जगह-जगह, हर चौराहे पर, बाजार में तथा ऊँची ऊँची दीवारों पर लगाए गए हैंक्योंकि
तुम्हारे कंधों पर टिकी है-ये धरती
तुम्हारा हिलना
बहुत बड़ा प्रलय ला सकती है,इसलिए
सावधान हो जाओ
झुकने न दो कंधे को
धैर्यपूर्वक थामे रहो – देखना
आकाश चाँद के चमक के साथ
तारेनुमा फूल बरसाएगा और तुम
भानु सा चमक उठोगे।

रत्नेश कुमार शर्मा
मिहिजाम, जामताड़ा
(झारखंड)

Search Khabar [ सच का सर्च सच के साथ,सर्च खबर आपके पास ]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Become a Journalist
Feedback/Query