चांदमणि ने भाड़े के वाहन से शुरू किया था बिजनेस

जमशेदपुर : ट्रांसपोर्ट जैसे पुरुषाें के पेशे में आदिवासी महिला चांदमणि कुंकल एक बड़ा नाम है। कुंकल इंटरप्राइजेज टाटा स्टील के बड़े वेंडराें में शुमार है। फर्म में 120 से अधिक लोग काम करते हैं, जिनमें अधिकतर आदिवासी युवा हैं। चांदमणि की सफलता की कहानी संघर्षों से भरी है। उन्हाेंने भाड़े पर एक ट्रेलर लेकर वर्ष 2011 में ट्रांसपोर्टिंग का काम शुरू किया। धीरे-धीरे काम बढ़ा और उसी साल टाटा स्टील ने बताैर वेंडर ढुलाई का काम दे दिया। वर्तमान में इनके पास 50 से ज्यादा ट्रक, ट्रेलर, क्रेन व डंपर हैं। सालाना करोड़ों रुपए का टर्नओवर है।

मेहनत से मिला मुकाम, ट्रांसपोर्ट में 50 से अधिक ट्रक-ट्रेलर
चांदमणि कुंकल ने बताया कि शुरुआत में सास-ससुर ने ट्रांसपोर्टर के काम का विरोध किया। लेकिन पति का साथ मिला, ताे हिम्मत बढ़ी अाैर काम काे आगे बढ़ाया। सामाजिक तौर पर भी काफी दिक्कतें हुईं। इसके बावजूद हार नहीं मानी और लगातार मेहनत, अनुशासन व आत्मविश्वास के बूते आगे बढ़ती गईं। काम में फायदा देख हिम्मत और बढ़ी। चांदमणि कहती हैं- अगर आप लक्ष्य तय कर पूरे विश्वास से आगे बढ़ें, ताे सफलता निश्चित है।

भूगाेल व हाे भाषा में एमए किया सिदाे कान्हू काॅलेज में हैं लेक्चरर

विजया गार्डन की रहने वाली चांदमणि कुंकल उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। उन्हाेंने भूगोल व हो भाषा में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। वे अखिल भारतीय आदिवासी महासभा से भी जुड़ी हैं। वे मुसाबनी स्थित सिदाे कान्हू इंटर जनजातीय कॉलेज में भूगोल की लेक्चरर भी हैं। इनके पति दानिश कुंकल का दाे साल पहले निधन हाे गया। बेटा प्रतीक डेविड नौवीं कक्षा में पढ़ रहा है।

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