कॉंग्रेस विधायक बंधु तिर्की को तीन साल की सजा,3 लाख का जुर्माना, रकम अदा न करने पर 6 माह अतिरिक्त सजा

रांची.राँची। आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआइ की विशेष अदालत ने कॉंग्रेस विधायक बंधु तिर्की को दोषी करार दिया. कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनायी है. इसके साथ ही 3 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माने की रकम अदा न करने पर 6 माह अतिरिक्त सजा काटनी होगी. इसके साथ ही उनकी विधायकी चली गयी है. विशेष न्यायाधीश प्रभात कुमार शर्मा की अदालत ने फैसला सुनाया. इसके पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. बंधु तिर्की पर छह लाख 28 हजार आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था. जिस पर सीबीआइ की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया।

आय से अधिक संपत्ति मामले में झारखंड के पूर्व मंत्री और रांची के मांडर से विधायक बंधु तिर्की को दोषी पाया गया है। सोमवार को CBI के विशेष जज पीके शर्मा की अदालत ने उन्हें 3 साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा होगी। हालांकि, बंधु तिर्की को अदालत से आज ही बेल मिल सकती है। कागजी प्रक्रिया चल रही है।

सजा के बाद उनकी विधायकी भी खतरे में पड़ गई है। कानून के अनुसार, 2 साल से अधिक की सजा पर विधायक की सदस्यता खत्म हो जाती है।

झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तिर्की पर आय से छह लाख 28 हजार 698 रुपए अधिक अर्जित करने का आरोप है। CBI ने तिर्की के खिलाफ कोड़ा कांड में 11 अगस्त 2010 को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। 12 दिसंबर 2018 को बनहौरा स्थित आवास से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। करीब 40 दिन जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।

जनवरी 2019 में गठित हुआ था आरोप
16 जनवरी 2019 को आरोप गठित किया गया था। इस मामले में CBI एसपी और मामले के जांच अधिकारी पीके पाणिग्रही और रांची के तत्कालीन डीसी राजीव अरुण एक्का समेत 21 गवाही दर्ज कराई गई हैं। जबकि, बचाव पक्ष की ओर से पांच गवाही कराई गई। बता दें, CBI कोर्ट की सख्ती के बाद 24 फरवरी 2019 से 16 मार्च 2019 तक लगातार मामले में बचाव पक्ष की ओर से बहस की गई थी। पिछले दो साल से बहस लंबित थी।

क्लोजर रिपोर्ट को अदालत ने किया था रद्द
CBI दिल्ली ने बंधु तिर्की के मामले में जांच की और मई 2013 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। इसमें कहा गया था कि तिर्की के पास आय से अधिक संपत्ति पाई गई है, लेकिन संपत्ति इतनी कम है कि इस मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के पक्ष में नहीं हैं। CBI के विशेष न्यायाधीश ने क्लोजर रिपोर्ट की समीक्षा के बाद इस पक्ष को अमान्य करार दिया था। उन्होंने कहा था, ‘आरोपी के पास आमदनी के मुकाबले 30 प्रतिशत अधिक राशि है। जो ट्रायल चलाने लायक है।’

 बंधु तिर्की के खिलाफ मंत्री रहते करीब छह लाख रुपये आय से अधिक अर्जित करने का आरोप है. इस मामले की सुनवाई सीबीआइ कोर्ट में चल रही है. बंधु तिर्की की ओर से 24 फरवरी से लगातार बहस की जा रही थी. बचाव पक्ष की बहस पूरी होने के बाद सीबीआई की ओर से बहस की गई. दोनों पक्षों की बहस समाप्त होने के बाद अदालत ने फैसले की तिथि तय की है.

कांग्रेस नेता और वर्तमान में मांडर विधानसभा के प्रतिनिधि बंधु तिर्की मधु कोड़ा की सरकार में शिक्षा मंत्री थे। साल 2005 से 2009 के बीच मंत्री रहते उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस चल रहा है।  बंधु तिर्की पर अपने से 6  लाख 28 हज़ार  ज्यादा होने का आरोप है।  इस मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था । सीबीआई ने उन्हें 12 दिसंबर 2018 को उनके आवास से गिरफ्तार भी किया था।  पूरे 40 दिनों के बाद बंधु तिर्की को इस मामले में बेल मिल पाया था।

सीबीआई के विशेष जज पीके शर्मा की अदालत ने पिछले दिनों बंधु तिर्की को बहस प्रारंभ करने का निर्देश दिया था. मामले में सीबीआई की ओर से 6 दिसंबर 2019 को ही बहस पूरी होने के बाद बंधु तिर्की का बयान दर्ज किया गया था. बयान के बाद उनकी ओर से अपने बचाव में गवाहों को पेश किया गया. 5 मार्च 2020 को गवाही बंद होने के बाद मामला बहस पर चला गया. कोविड-19 के कारण भी मामले की सुनवाई प्रभावित रही. हालांकि कोर्ट की सख्ती के बाद सुनवाई में तेजी आई.विज्ञापन

बता दें कि बंधु तिर्की के खिलाफ आय से 6 लाख 28 हजार 698 रुपए अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप है. वह इस मामले में जेल जाने के बाद जमानत पर बाहर हैं. सीबीआई ने बंधु तिर्की के खिलाफ 11 अगस्त 2010 को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी.

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