झारखंड के डॉ. विजय शंकर एवं पश्चिम बंगाल के रवीन्द्रनाथ को ‘रवींद्र चंद्र स्मृति पुरस्कार’

देवघर। आगामी 26 फरवरी को स्थानीय सिद्धिविनायक बैंक्वेट हॉल में पश्चिम बंगाल के आर. सी. भौमिक मेमोरियल ट्रस्ट एवं विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के युग्म बैनर तले आयोजित सम्मान समारोह में ट्रस्ट के संस्थापक न्यासी राजर्षि भौमिक एवं वेक्सो इंडिया के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव के करकमलों से पश्चिम बंगाल राज्य के उत्तर 24 परगना के श्यामनगर निवासी, समाजसेवी रवींद्रनाथ भट्टाचार्य को विद्या वाचस्पति रवींद्र चन्द्र स्मृति समाजसेवी रत्न सम्मान पुरस्कार एवं स्थानीय रामेश्वर लाल सर्राफ उच्च विद्यालय के सहायक शिक्षक डॉ. विजय शंकर को विद्या वाचस्पति रवींद्र चन्द्र स्मृति शिक्षा रत्न सम्मान पुरस्कार की मानद उपाधि से अलंकृत की जाएगी। ज्ञात हो स्व० भुवनेश्वर शर्मा एवं स्व० करपुर देवी के संतान विजय का जन्म देवघर जिले के मधुपुर अनुमंडल के बभनगामा ग्राम में 15 मई, 1977 को हुआ था। इनकी प्राथमिक शिक्षा राम चरण सिंह मध्य विद्यालय, बभनगामा से हुई। ततपश्चात राय बहादुर जगदीश प्रसाद सिंह इंटरस्तरीय विद्यालय, बभनगामा से माध्यमिक, बिहार नेशनल काॅलेज, पटना से इंटर, पटना विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नाकोत्तर, बी.एड., एल.एल.बी., पी.एच.डी. की पढ़ाई पूरी की। इनकी नियुक्ति प्राथमिक शिक्षक के रूप में, जे.पी.एस.सी. द्वारा चयनित (2004), 2010 में माध्यमिक शिक्षक के रूप में जबकि जे.पी.एस.सी. द्वारा 2012 में +2 विद्यालय में हुई। वे वर्त्तमान में रामेश्वर लाल सर्राफ उच्च विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में पदस्थापित हैं। उन्हें शोध कार्य के दरम्यान स्नात्तक पर, पटना काॅलेज पटना में, अध्यापन में विशेष अनुभव है। विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों में सम-सामयिक विषयों पर आलेख, छात्रोपयोगी सुझाव, शैक्षणिक विचार प्रकाशित होती रहती है। श्वेतपत्र, राष्ट्रीय सागर में संपादकीय, शहर परिक्रमा में कविता, आलेख, निबंध प्रकाशित। रिपब्लिक नेशन सांध्यकालीन प्रायः सभी चर्चित और ज्वलंत मुद्दों पर लेखन इनका रूटीन बन गया है। 2021 में प्रथम पद्य संग्रह पुस्तक, विजय वल्लरी, मेरे मन तरंग का प्रकाशन भी हो चुका है जबकि वैचारिक ज़मीन की नई फसल, आलेख संग्रह प्रकाशनाधीन है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी के नाम पर अटल लैंग्वेज लैब की स्थापना और हिन्दी,संस्कृत और अंग्रेजी भाषा में पारंगतता हेतु जिज्ञासु, ज्ञानपिपासु को नि:शुल्क सहयोग देना ही इनका ध्येय बन चुका है। वे प्रत्येक रविवार को ज्ञानशाला का आयोजन भी करते आ रहे हैं। विक्रमशिला विश्वविद्यालय से विद्या सागर सम्मान,, देवघर के लगभग सभी काव्यमंच और साहित्यिक गतिविधियों में सहभागिता तथा पठन-पाठन और उत्कृष्ट लेखन के लिए पुरस्कृत भी हो चुके हैं। देवघर वासियों को इन पर गर्व है।

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