बिहार के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य के खजाना पर सबसे पहला हक आपदा पीड़ितों का है। बाढ़ पीड़ितों को किसी तरह की कठिनाई नहीं होने दी जाएगी। सभी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। जहां से भी सूचना या जानकारी मिलती है वहां अधिकारियों को भेज कर निदान किया जा रहा है। वे शनिवार को समस्तीपुर जिले में गंगा की बाढ़ से प्रभावित मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर और विद्यापतिनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने के साथ ही राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए पहुंचे थे।

बाढ़ राहत कार्य का जायजा लेने के बाद विद्यापतिनगर के शेरपुर ढेपुरा में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जिलों में बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि समस्तीपुर में भी काफी प्रभाव पड़ा होगा। इसलिए वे सभी का हाल चाल जानने और राहत कार्य का जायजा लेने के लिए आये हैं।
उन्होंने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के रहने व खाने के साथ ही पशुओं के चारे की भी व्यवस्था की गयी है। बाढ़ पीड़ित परिवारों को सहायता मुहैया करायी जा रही है। सभी जगह मैं स्वयं जाकर बाढ़ पीड़ितों का हाल चाल पूछ रहा हूं।

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। जिन जगहों पर मुख्यमंत्री को जाना था वहां प्रशासनिक अधिकारियों को छोड़कर किसी अन्य को जाने की अनुमति नहीं थी। मोहिउद्दीननगर में दिन के करीब 12.25 बजे आरबीएस कॉलेज में बने हेलीपैड पर मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरा। उतरने के बाद डीएम शशांक शुभंकर और एसपी मानवजीत ढिल्लो के नेतृत्व में अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उसके बाद मुख्यमंत्री दो किमी दूर स्थित आइआइटी परिसर पहुंचे। जहां मवेशी पालकों से मवेशी चारा मिलने के बारे में जानकारी ली। उसके बाद टॉउन हॉल पहुंचे जहां बाढ़ पीड़ित परिवारों के स्कूली बच्चों से पढ़ाई के बारे में जानकारी ली।

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