सरकार की दिलचस्पी सिर्फ राजस्व वसूलने में, गरीबों को राहत देने में नहीं

नई दिल्ली: राज्यसभा में मंगलवार को विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने पेट्रोल एवं डीजल की बढ़ती कीमतों (Petrol-Diesel Price Hike) को लेकर सरकार को घेरते हुए दावा किया कि उसकी दिलचस्पी गरीबों को राहत देने में नहीं बल्कि राजस्व वसूलने में है। वहीं, विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान सरकार ने गरीब लोगों को निशुल्क अनाज मुहैया कराने सहित जिस प्रकार से विभिन्न कार्यों पर धन खर्च किया है, उससे पता चलता है कि यह सरकार गरीबों के हित में काम कर रही है। विपक्ष ने सरकार को यह भी सुझाव दिया कि राजकोषीय घाटा बढ़ने की चिंता किए बिना उसे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए धन खर्च करना चाहिए।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ना क्या गरीबों के हित में है?
उच्च सदन में विनियोग विधेयक एवं वित्त विधेयक पर हुई संयुक्त चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के शांतनु सेन (Shantanu Sen) ने कहा कि देश में गरीबों की संख्या 80 करोड़ से अधिक है। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में पेट्रोल और डीजल की कीमत में सात बार वृद्धि हुई है। उन्होंने सवाल किया ‘‘क्या यह गरीबों के हित में है?’’ उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण किया जा रहा है और इस कदम को गरीबों के हित में कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की दिलचस्पी राजस्व वसूलने में है, गरीबों को राहत देने में नहीं।

‘भारत ने अपने इतिहास में कभी इतनी कठोर सरकार नहीं देखी’
सेन ने कहा कि इसी तरह घरेलू रसोई गैस के दाम में 23 प्रतिशत की वृद्धि (LPG Cylinder Price Hike) बीते एक साल में हुई है। उन्होंने कहा ‘‘लोग आज केरोसिन का उपयोग करने के लिए बाध्य हो रहे हैं लेकिन केरोसिन के दाम भी उनकी पहुंच से बाहर हो गए हैं।’’ उन्होंने आगे कहा कि पेट्रोल व डीजल की कीमत में वृद्धि के बाद हर चीज महंगी हो रही है और आम लोगों के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा ‘‘भारत ने अपने इतिहास में कभी इतनी कठोर सरकार नहीं देखी।’’

‘देश के युवा दूसरे देशों में जाकर तलाश रहे रोजगार’
शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा ‘‘बीमा उद्योग के वेतन की समीक्षा होनी थी। इस उद्योग के कर्मचारियों ने कोविड काल में लगातार काम किया था। उनके वेतन की समीक्षा की जानी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि आज देश के युवा दूसरे देशों में जा कर रोजगार की तलाश कर रहे हैं क्योंकि हमारे यहां रोजगार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि छह लाख भारतीयों ने तो दूसरे देशों में रोजगार हासिल कर यहां की नागरिकता भी छोड़ दी।

चतुर्वेदी ने कहा ‘‘आज हम दुनिया में एकमात्र ऐसे देश हैं जो क्रिप्टो करेंसी पर विधेयक (Cryptocurrency Bill) लाने से पहले ही उस पर कर लगा देता है। यह स्थिति तब है जब हमें क्रिप्टो करेंसी के दर्जे के बारे में पता ही नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि क्रिप्टो के बारे में समझे बिना ही फैसला किया गया है। दूसरे देशों में कई बड़ी कंपनियां ऐसी हैं जिनके प्रमुख भारतीय हैं। अगर वे भारतीय हमारे देश में अपनी प्रतिभा का उपयोग करते तो निश्चित रूप से इसका फायदा भारत को होता।’’

‘महामारी के कारण देश के लिए दो वर्ष बड़े कठिन रहे’
भाजपा सदस्य के. जे. अल्फोंस ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि सूक्ष्म अर्थव्यवस्था के मामले में देश की बहुत गुलाबी तस्वीर है। उन्होंने कहा कि देश कोरोना महामारी (Covid Pandemic) के कारण दो बहुत कठिन वर्षों से गुजरा है। उन्होंने कहा कि जब लोग इस बात की उम्मीद कर रहे थे कि अब चीजें सुधरनी शुरू होगी तो उसी बीच रूस एवं यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) शुरू हो गया जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था फिर नीचे की तरफ जाने लगी है।

भाजपा सदस्य ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अगले वित्त वर्ष में खर्च की जाने वाली कुल राशि 39.34 लाख करोड़ रूपये प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि पिछले बजट में यह 34.85 लाख करोड़ रूपये थी और बाद में 37.07 लाख करोड़ रूपये खर्च किए गये।

‘हम विश्व की सबसे तेज विकास करने वाली अर्थव्यवस्था हैं’

जे. अल्फोंस ने कहा कि विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मनरेगा, स्वास्थ्य एवं खाद्य सब्सिडी पर समुचित खर्च नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता तो सरकार को पिछले साल के बजट से 2.8 लाख करोड़ रूपये अधिक खर्च करने के लिए संसद से अनुमति मांगने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि यह भारत के लोगों के लिए जरूरी था इसलिए इन्हें खर्च किया गया। यदि अर्थव्यवस्था के आधारभूत तत्वों की ओर देखें तो हम 9.2 प्रतिशत की दर से विकास कर रहे हैं। यह सिर्फ सरकार नहीं विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष भी कह रहे हैं। हम विश्व की सबसे तेज विकास करने वाली अर्थव्यवस्था हैं।

अल्फोंस ने स्वीकार किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों एवं जिंसों की कीमतें बढ़ने से अगले साल देश की विकास दर घटकर आठ से साढ़े आठ दस प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने कहा कि उसके बावजूद भारत सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में मांग जोर नहीं पकड़ी है। इसलिए अर्थव्यवस्था में धन लगाना होगा। उन्होंने कहा कि लोगों के हाथों में धन पहुंचाना होगा ताकि लोगों की क्रय क्षमता बढ़ सके। सरकार को इस मामले में राजकोषीय घाटे की अधिक परवाह नहीं करनी चाहिए और लोगों के हाथों तक धन पहुंचाना चाहिए।

भाजपा सदस्य जे. अल्फोंस ने कहा कि भारत के निर्यात आंकड़ों में भारी वृद्धि हो रही है और यह 400 अरब डालर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है । उन्होंने कहा कि भारत के गुणवत्तापूर्ण निर्यात में बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह पूछ रहा है कि सरकार ने गरीबों के लिए क्या किया। भाजपा सदस्य ने प्रश्न किया कि जो 11 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ है क्या वे अंबानी एवं अडाणी के लिए बनाए गए हैं? सरकार ने जो दो करोड़ मकान बनवाए हैं क्या वे अंबानी या अडाणी के लिए हैं या गरीबों के लिए हैं? उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान जो लाखों टन अनाज गरीबों को निशुल्क दिया गया तो वह किनके लिए था?

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