महिलाओं को सशक्त व स्वाबलंबी बनाना सरकार की प्राथमिकताः- उपायुक्त

देवघर : गणतंत्र दिवस के अवसर पर समाहरणालय परिसर में कृषक पाठशाला अंतर्गत उत्पादित बटन मशरूम प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस दौरान उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने बटन मशरूम प्रदर्शनी का निरीक्षण करते हुए ग्रामीण महिलाओं द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इस दिशा में और भी गांव की महिलाओं को जोड़ते हुए बेहतर करने की बात कही।

इसके अलावे उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि खेती के क्षेत्र में अच्छी कमाई करने का बेहतर विकल्प बटन मशरूम है। यह मशरूम की ही एक किस्म है, मगर इसमें खनिज पदार्थ और विटामिन खूब होते हैं। इसकी विशेषता है कि आप इसे झोपड़ी में लाभप्रद खेती कर सकते हैं। मशरूम स्वास्थ्य फायदे की वजह से लगातार बाजार में भी इसकी मांग बढ़ती जा रही है। वही कम लागत में बटन मशरुम की मौसमी खेती करने के लिए अक्तूबर से मार्च तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। सफेद बटन मशरुम की खेती के लिए स्थाई व अस्थाई दोनों ही प्रकार के सेड का प्रयोग किया जा सकता है। जिन किसानों के पास धन की कमी है, वह बांस व धान की पुआल से बने अस्थाई सेड/झोपड़ी का प्रयोग कर सकते हैं। आगे उपायुक्त ने कहा कि मशरूम एक उत्पाद है, जिसे एक कमरे में भी उगाया जा सकता है, इसको उगाकर लोग अपनी आय आसानी से बढ़ा सकता है बस आवश्यक है इस खेती को सही दिशा देने की। ऐसे में कृषि विभाग व आत्मा के अधिकारी आपसी समन्वय के साथ गांव की महिलाओं को सीजनल मशरूम की खेती के प्रति प्रोत्साहित, प्रशिक्षित, क्लस्टर निर्माण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहे हैं, ताकि किसान मित्रों के साथ ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मशरूम उत्पादन के कार्य से जोड़ा जा सके। पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान मशरूम की खेती की तरफ तेजी से बढ़ा है, मशरूम की खेती बेहतर आमदनी का जरिया बन सकती है। बस कुछ बातों का ध्यान रखना होता है, बाजार में मशरूम का अच्छा दाम मिल जाता है। कम जगह और कम समय के साथ ही इसकी खेती में लागत भी बहुत कम लगती है, जबकि मुनाफा लागत से कई गुना ज्यादा मिल जाता है।

इसके अलावे मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री द्वारा जानकारी दी गयी कि ग्रामीण महिलाओं से मिलकर बटन मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक एक्स्पेरिमेन्ट के तौर पर इनको प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि ग्रामीण महिलाएं मशरूम उत्पादन कर स्थानीय बाजार या शहरी क्षेत्र में बेच कर अपनी आय को बढ़ा सकें। जेएसएलपीएस, कृषि विभाग व आत्मा के सहयोग से जिले की ग्रामीण महिलाओं को जोड़ते हुए इन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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