केजरीवाल क्यों गुस्से में, दिल्ली की तीनों एमसीडी को एक करने से क्या हो जाएगा

नई दिल्ली: दिल्ली में अब तीन की बजाय एक ही नगर निगम होगा। तीनों नगर निगमों को एक करने वाले विधेयक को मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। उम्मीद की जा रही है कि यह विधेयक इसी सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा। संसद की मंजूरी के बाद तीनों नगर निगमों का विलय हो जाएगा और 2012 से पहले की तरह ही दिल्ली में एक ही निगम और एक ही मेयर होगा। हालांकि, केंद्र के इस फैसले से दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) गलत ट्रेंड बता रही है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल  ने चुनाव टालने को लेकर केंद्र पर हल्ला बोला था। उन्होंने कहा था कि कैसे कोई चुनाव टाले जा सकते हैं।

एमसीडी को एक करने के पीछे केंद्र का क्या है तर्क?

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई कैबिनेट की बैठक में इस विधेयक को पेश किया गया। इसमें दिल्ली नगर निगम 1957 के मूल अधिनियम में कुछ संशोधन का प्रस्ताव है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि लगभग एक दशक पहले दिल्ली नगर निगम के बंटवारे के बाद निगम कमजोर हो गए और उनकी आमदनी में संतुलन भी बिगड़ गया। जिसकी वजह से एक को छोड़कर बाकी दोनों नगर निगम वित्तीय रूप से इतने कमजोर हो गए कि इनके कर्मचारियों को वेतन और रिटायरमेंट पर दी जाने वाली राशि देना भी मुश्किल हो गया। नए विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद एकीकृत नगर निगम पूरी तरह से संपन्न निकाय होगा। इसमें वित्तीय संसाधनों का संकट भी खत्म होगा और खर्चों में भी कमी आएगी और कामकाज को बेहतर करने में मदद मिलेगी। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि क्या नगर निगमों के एक होने के बाद कुछ ऐसे विभाग वापस लाए जाएंगे, जिन्हें दिल्ली सरकार को दे दिया गया था।
केजरीवाल ने बोला था केंद्र पर हमला
सीएम केजरीवाल ने चुनाव टालने को लेकर केंद्र पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि भाजपा भाग गई है और एमसीडी चुनाव को टाल दिया है और हार मान ली है। दिल्ली वाले खूब गुस्सा हैं। आप नेता आतिशी ने कहा कि बीजेपी को एमसीडी चुनाव में अपनी हार साफ नजर आ रही थी। इसी डर से अचानक केंद्र सरकार को तीनों निगमों को एक करने का खयाल आ गया। आप ने इस तरह से चुनाव टाले जाने को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और कहा कि इस तरह तो बीजेपी दूसरे राज्यों और लोकसभा के चुनाव भी टाल सकती है।

भाजपा भाग गई। MCD चुनाव टाल दिया, हार मान ली। दिल्ली वाले खूब गुस्‍सा हैं। कह रहे हैं इनकी हिम्मत कि चुनाव ना कराएं? अब इनकी जमानत जब्त कराएंगे। हमारे सर्वे में अभी 272 में से 250 सीट आ रहीं थीं। अब 260 से ज्‍यादा आएंगी। पर चुनाव आयोग को भाजपा के दबाव में नहीं आना चाहिए था।

अरविंद केजरीवाल का ट्वीट

शीला दीक्षित का कार्यकाल में हुआ था बदलाव
पहले दिल्ली में एक ही नगर निगम था, लेकिन 2011 में इसे तीन भागों में बांटकर दक्षिण, पूर्वी और उत्तरी दिल्ली नगर निगम का गठन किया गया। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सरकार का तर्क था कि दिल्ली काफी फैल चुकी है। ऐसे में एक ही नगर निगम की बजाय अगर उसे विभाजित कर दिया जाए तो स्थानीय स्तर पर बेहतर कामकाज होगा। हालांकि विभाजन के बाद पूर्वी और उत्तरी दिल्ली नगर निगमों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा, क्योंकि इन क्षेत्रों में नगर निगमों की होने वाली आमदनी और खर्चों के बीच संतुलन नहीं था। जिसकी वजह से इन नगर निगमों का कामकाज प्रभावित हो रहा था।
क्या होगा आगे?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब दिल्ली नगर निगम के प्रावधानों में बदलाव वाले इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में बारी बारी से पेश करके मंजूरी ली जाएगी। संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद नया कानून अस्तित्व में आ जाएगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

कई मुद्दों पर अभी भी सस्पेंस
1. क्या 2011 की तरह ही सिर्फ तीनों निगमों का एकीकरण करके दिल्ली नगर निगम बन जाएगी या फिर इसमें कुछ और बदलाव होंगे। मसलन, मेयर इन काउंसिल होगी या फिर पहले की तरह ही मेयर और कमिश्नर के अधिकार होंगे।
2. अगर मेयर इन काउंसिल होगी तो उसे क्या क्या अधिकार दिए जाएंगे। मसलन, क्या मेयर को इतने अधिकार दिए जाएंगे कि वो सरकार के समानांतर अधिकार प्राप्त होगा।
3. क्या वॉर्ड 272 ही रखे जाएंगे या उन्हें कम किया जाएगा? अगर कम किया जाएगा तो क्या 2011 वाली स्थिति बहाल होगी या फिर मौजूदा वार्डों की संख्या में कमी की जाएगी।
4. वॉर्डों का परिसीमन नए सिरे से किया जाएगा? अगर ऐसा होगा तो वो क्या पिछली जनगणना के आधार पर ही होगा।
5. क्या नगर निगम के मातहत अभी जो विभाग हैं, वही रहेंगे या फिर दिल्ली सरकार से भी कुछ ऐसे विभाग वापस लिए जाएंगे, जो पहले दिल्ली नगर निगम के अधीन होते थे। मसलन, जल सप्लाई, फायर सर्विस आदि?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन मुद्दों पर स्थिति तभी साफ होगी, जब संसद में यह विधेयक पेश किया जाएगा। उस विधेयक से ही पता चलेगा कि केंद्र सरकार सिर्फ निगमों का एकीकरण करने जा रही है या फिर नगर निगम के पूरे ढांचे में ही बदलाव किया जाएगा।

तीनों निगम के एक होने के बाद 220 तक सिमट जाएगी वॉर्डों की संख्या

गृह मंत्रालय के एमसीडी के यूनिफिकेशन प्रपोजल पर कैबिनेट ने मंगलवार को मुहर लगा दी है। अब यूनिफिकेशन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। इसके पहले मंत्रालय ने तीनों एमसीडी को एक करने को लेकर दिल्ली में वॉर्डों के परिसीमन को लेकर एमसीडी अफसरों से सुझाव मांगे थे। अफसरों ने मंत्रालय को जो सुझाव दिया है, उसमें दिल्ली की मौजूदा जनसंख्या के आधार पर परिसीमन कराने की बात कही है। नई परिसीमन के आधार पर वॉर्डों की संख्या करीब 50-52 तक कम करने का भी सुझाव दिया है।

वर्तमान में तीनों एमसीडी में 272 वॉर्ड हैं
वर्तमान में तीनों एमसीडी को मिलाकर 272 वॉर्ड हैं। नॉर्थ एमसीडी के 6 जोन में 104, साउथ एमसीडी के 4 जोन में 104 और ईस्ट एमसीडी के दो जोन में 64 वॉर्ड हैं। परिसीमन के बाद वॉर्डों के बंटवारे का जो प्लान तैयार किया गया है, उसमें साउथ और ईस्ट एमसीडी में वॉर्डों की संख्या कम की जाएगी। ऐसा इसलिए कि साउथ एमसीडी में 4 जोन हैं और वॉर्ड 104 हैं। इसी तरह से ईस्ट एमसीडी में भी वॉर्डों की संख्या अधिक है, जिसे कम किया जाएगा। तीनों एमसीडी के अलग अलग विधानसभाओं में से कई में 4 वॉर्ड के बजाय 7 या 8 वॉर्ड हैं, जिसे कम किया जाएगा।

एक वॉर्ड में अधिकतम 80 हजार तक वोटर्स होंगे
2007 में जब परिसीमन किया गया था, तब एक वॉर्ड में अधिकतम वोटर्स की संख्या 40 हजार रखी गई थी। 2016-17 में परिसीमन के दौरान एक वॉर्ड में वोटरों की संख्या 40 हजार से बढ़ाकर 60 हजार कर दिया गया। अब, जो परिसीमन का प्लान है, उसमें वॉर्डों की संख्या कम की जाएगी और वोटरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। एक वॉर्ड में अधिकतम 80 हजार तक वोटर्स होंगे। एमसीडी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा परिसीमन के आधार पर एमसीडी के कार्य क्षेत्र में आने वाले 68 विधानसभाओं में से प्रत्येक में 4-4 ही वॉर्ड होने चाहिए। लेकिन, कई ऐसी विधानसभा हैं, जिसमें वॉर्डों की संख्या काफी अधिक है। साउथ एमसीडी के विकासपुरी विधानसभा में 4 के बजाय 7 वॉर्ड हैं। इसी तरह से मटियाला विधानसभा में भी 7 वॉर्ड हैं। बदरपुर विधानसभा में 6 और ओखला विधानसभा क्षेत्र में 5 वॉर्ड हैं। नॉर्थ एमसीडी में बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र में 6 वॉर्ड हैं। नरेला, रिठाला, मुंडका और किराड़ी विधानसभा क्षेत्रों में 5-5 वॉर्ड हैं। नॉर्थ एमसीडी में कुछ ऐसे विधानसभा क्षेत्र भी हैं, जहां सिर्फ 3-3 वॉर्ड ही हैं। इनमें आदर्श नगर, त्रिनगर, वजीरपुर, मॉडल टाउन, चांदनी चौक, बल्लीमरान और करोल बाग विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इसलिए प्लान है कि यूनिफिकेशन से पहले मौजूदा जनसंख्या के आधार पर वॉर्डों का परिसीमन कर सभी विधानसभाओं में वॉर्डों की संख्या एक समान रखी जाए।

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