यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति का केंद्र बना भारत

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध अप्रत्याशित रूप से लंबा खिंच गया है। ऐसे में विश्वस्तरीय कूटनीति का दौर जोर पकड़ रहा है और इसका एक बड़ा केंद्र है भारत। पिछले कुछ हफ्तों में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, अमेरिका की राजनीतिक मामलों की उप-विदेश मंत्री विक्टोरिया नुलैंड जबकि ऑस्ट्रिया एवं यूनान के विदेश मंत्रियों सहित कई उच्च स्तरीय हस्तियों ने भारत की यात्रा की है। आने वाले दिनों में ब्रिटेन और रूस के विदेश मंत्री के साथ-साथ इजरायली प्रधानमंत्री भी भारत आने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति प्रयासों के तहत यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर लंबी बातचीत की थी। हालांकि, भारत संयुक्त राष्ट्र (UN) में रूस के खिलाफ प्रस्तावों पर वोटिंग से अपने को दूर ही रखा है। इस कारण भी दुनिया की निगाहें भारत पर जम गई हैं।

गुरुवार को भारत आएंगी ब्रिटिश विदेश मंत्री
ब्रिटेन की विदेश मंत्री एलिजाबेथ ट्रस 31 मार्च को भारत आने वाली हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी। हालांकि मंत्रालय के बयान में ट्रस की यात्रा के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा का जिक्र नहीं है। बयान में कहा गया है, ‘यह यात्रा व्यापार और निवेश, साइंस, टेक्नॉलजी और इनोवेशन, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु सहयोग, शिक्षा और डिजिटल कम्यूनिकेशन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में हमारी साझेदारी को और गहरा करने का काम करेगी।’ इस बयान के इतर यह संभव नहीं है कि रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध की चर्चा नहीं हो। ब्रिटेन में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र में हो रही वोटिंग से भारत लगातार दूरी बना रहा है। इसी महीने ब्रिटिश उप-प्रधानमंत्री डॉमिनिक राब ने भारत और चीन पर वोटिंग में भाग लेने का दबाव बनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था, ‘चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्थायी सदस्य है और भारत को भी अस्थायी सदस्यता मिली हुई है। भारत को भी आगे आना होगा। हमें कूटनीतिक दबाव बनाने की जरूरत है।’ रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका ब्रिटेन को भी झेलनी पड़ रही है। उसके यहां यूक्रेनी शरणार्थियों की बाढ़ आ गई है।
3 अप्रैल को पहुंचने वाले थे इजरायली पीएम
भारत दौरे पर आने वालों की लिस्ट में इजराइली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट का नाम भी शामिल था, लेकिन उन्हें कोविड हो गया। इस कारण उनकी अगले सप्ताह होने वाली भारत यात्रा फिलहाल स्थगित कर दी गई है, अब इसकी नई तारीख तय की जाएगी। प्रधानमंत्री बेनेट के मीडिया सलाहकार ने यह जानकारी दी। वह 3 से 5 अप्रैल के बीच भारत की यात्रा करने वाले थे। मीडिया सलाहकार ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की भारत यात्रा स्थगित कर दी गई है और इसके लिए नई तारीख तय की जाएगी।’ ध्यान रहे कि इजरायल और भारत के बीच हर मोर्चे पर गहरी साझेदारी है। इजरायल ने पहली बार अरब विदेश मंत्रियों के साथ बैठक की मेजबानी की। दक्षिणी इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में इजरायल के विदेश मंत्री यायर लैपिड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, मोरक्को और मिस्र के समकक्षों के बीच रविवार को शुरू हुआ दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न हुआ। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी सोमवार को सम्मेलन में भाग लिया। नफ्ताली अपने दोस्त भारत से इन गतिविधियों के साथ-साथ यूक्रेन-रूस जंग पर चर्चा करने को आने वाले थे।

भारत दौरे में चीनी विदेश मंत्री ने भी उठाया यूक्रेन का मुद्दा

चीनी विदेश मंत्री वांग यी 25 मार्च को पाकिस्तान से भारत आए थे। इस दौरे की कोई पूर्व योजना नहीं थी। वांग मुस्लिम देशों के संगठन ओईआईसी की मीटिंग में भाग लेने इस्लामाबाद गए थे और वहां से अचानक भारत आ गए। यहां उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ वार्ता की और भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से भी भेंट की। वांग यी ने रूस-यूक्रेन के मुद्दे पर चीन का नजरिया पेश किया और जयशंकर ने उन्हें जारी युद्ध को लेकर भारत की सोच से परिचित कराया। दोनों ने एक-दूसरे के नजरिए से सहमति जताई। बातचीत के दौरान वांने ने कहा भी कि यात्रा के दौरान कहा कि अगर चीन और भारत एक ही स्वर में बोलते हैं, तो पूरा विश्व सुनेगा। अगर चीन और भारत मिलकर सहयोग करते हैं, तो पूरा विश्व इस पर ध्यान देगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के आईने में भारत-चीन सीमा संघर्ष को देखें तो वांग के दौरे के विशेष महत्व का पता चलता है। आक्रमण के कारण रूस की जैसी छवि बनी है, चीन उससे सबक जरूर ले रहा होगा। आखिर वह भी भारत के प्रति अतिक्रमणकारी नीति पर बढ़ने का ख्वाब देखता रहता है जिसे पूर्वी लद्दाख के संघर्ष में बड़ा झटका लगा है।
रूसी विदेश मंत्री की यात्रा
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 31 मार्च और 1 अप्रैल को भारत दौरे पर होंगे। उनकी यात्रा के दौरान नई दिल्ली द्वारा मॉस्को से तेल और सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए भुगतान प्रणाली पर चर्चा पर होने की उम्मीद है। मॉस्को द्वारा 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ सैन्य आक्रमण शुरू किए जाने के बाद से यह रूस की तरफ से भारत की सर्वोच्च स्तर की यात्रा होगी। हमले के दिन रूसी विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री से टेलिफोन पर बातचीत की थी। लावरोव ने भारत से मदद की अपील की थी। पिछले हफ्ते रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने मॉस्को में भारतीय राजदूत पवन कपूर से मुलाकात की थी।रूस-यूक्रेन संकट के बीच वैश्विक कूटनीति का केंद्र बना भारत
ध्यान रहे कि रूस-यूक्रेन युद्ध में पहले पहल तृतीय विश्व युद्ध की आहट सुनाई पड़ी लेकिन अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन नाटो ने मुंह मोड़ लिया तो ऐसा लगा मानो यूक्रेन जल्द ही तहस-नहस हो जाएगा और रूस का कब्जा होते ही युद्ध खत्म महो जाएगा। हालांकि, अटकलें धराशायी हो गई हैं। राहत की बात है कि तृतीय विश्व युद्ध की आशंका टलती दिख रही है लेकिन दुख भी है कि महीना बीत चुका है और युद्ध आज भी जारी है। नए वर्ल्ड ऑर्डर के निर्माण की प्रक्रिया में भारत कूटनीति का नया केंद्र बनकर उभरा है। ताकतवर पश्चिमी देश हों या फिर धूर्त पड़ोसी चीन, सबको भारत की अहमियत का अंदाजा अच्छे से है। यही वजह है कि दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। इसी सिलसिले में कुछ प्रमुख देशों के उच्च प्रतिष्ठित नेता भारत का दौरा कर रहे हैं।

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