भारतीय सेना के T-90 टैंक के लिए नाइट विजन टेक्नॉलजी अब प्राइवेट कंपनी को भी

नई दिल्ली: स्वदेशी रक्षा इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए भारत में कई तरह से काम हो रहा है। रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले डीआरडीओ ने T-90 टैंक के लिए नाइट साइट (रात में भी आराम से देख सकें) की टेक्नॉलजी कानपुर बेस्ड डिफेंस कंपनी एमकेयू को ट्रांसफर की है। यह पहली प्राइवेट कंपनी है जिसे डीआरडीओ ने यह टेक्नॉलजी ट्रांसफर की है।

भारतीय सेना के पास अभी 2000 से ज्यादा T-90 भीष्म टैंक हैं, 120 से ज्यादा अर्जुन टैंक हैं और 2400 के करीब टी-72 टैंक है। T-90 भारतीय सेना का मेन बैटल टैंक है। एमकेयू के डायरेक्टर वैभव गुप्ता के मुताबिक भारत में टी-90 टैंक के लिए ड्राइवर नाइट साइट बनाने के लिए डीआरडीओ के साथ मिलकर काम करने में एमकेयू इच्छुक था। मकसद यह है कि ऐसी डिवाइस विकसित की जाए जो टी-90 के साथ ही टी सीरीज के दूसरे टैंक, बीएमपी (इंफ्रैट्री फाइटिंग वीइकल) और दूसरे आर्म्ड वीइकल में भी फिट हो सके। नाइट साइट Netro TD 5100 से आर्मी का रिस्क कम होगा। नाइट साइट बेहतर होने पर टैंक में बैठे सैनिक की ताकत भी बढ़ेगी।

भारतीय सेना के बैटल टैंक में नाइट साइट होने से टैंक को बेहतर तरीके से ऑपरेट करने में भी मदद मिलेगी साथ ही आस पास के एरिया पर भी सटीक नजर रहेगी। टैंक में इस तरह के सेंसर की कमी से रात के वक्त ऑपरेशन में टैंक कमांडर और ऑपरेटर को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। टैंक को नाइट साइट मिलने से टैंक की डिटेक्शन रेंज भी बढ़ेगी साथ ही ज्यादा स्पीड में मूव कर सकेगा।

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