पाकिस्तान में पहली बार बनाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति

पाकिस्तान में पहली बार बनाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की यह घोषणा बेहद अहम है कि वह भारत के साथ अगले 100 वर्षों तक शांति बनाए रखना चाहता है। यूं तो यह दस्तावेज औपचारिक तौर पर शुक्रवार को जारी किया जाना है, लेकिन उसके कुछ अंश मीडिया के सामने पेश किए जा चुके हैं। 2022 से 2026 तक के लिए जारी यह पंचवर्षीय पॉलिसी डॉक्युमेंट कहता है कि भारत के साथ रिश्ते सुधारने और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कश्मीर का विवाद अंतिम तौर पर सुलझ जाने का इंतजार करना जरूरी नहीं है। उसे लेकर दोनों पक्षों में पॉजिटिव बातचीत जारी रखते हुए भी आपसी सहयोग और व्यापार को बढ़ावा देने का काम किया जा सकता है।

पाकिस्तान की तरफ से दिखाई गई यह भावना निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। खासतौर पर भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध कुछ इसी अंदाज में विकसित हुए, जबकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद है। याद करिए कि जब 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी चीन यात्रा पर गए तो चीनी नेता तंग श्याओफिंग ने उनसे कहा था कि सीमा विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी आने वाली पीढ़ियों पर छोड़ दिया जाए जो हमसे कहीं ज्यादा मच्योर होंगी। इसी नीति के तहत दोनों देश आपसी सहयोग बढ़ाने को राजी हुए। और दोनों के बीच व्यापार पिछले साल सौ अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गया। वैसे, इधर चीन के एलएसी पर आक्रामक रुख की वजह से भारत ने चीनी निर्यात और उसकी कुछ कंपनियों पर सख्ती की है, लेकिन दोनों देशों के व्यापार पर इस तनाव का बहुत असर नहीं हुआ है।

यह बात भी सही है कि भारत-पाक का मामला इससे अलग है। दोनों देश एक-दूसरे से कई मामलों में उलझे हुए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते हुए दोनों देशों के बीच रिश्ते सुलझने मुश्किल हैं। वह कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिला विशेष दर्जा समाप्त करने के फैसले को भी दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों से जोड़ चुके हैं। दूसरी तरफ भारत कह चुका है कि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति जारी रहते दोनों देशों के संबंधों में सुधार संभव नहीं है। ताजा सूचनाएं भी बताती हैं कि एलओसी के उस तरफ करीब चार सौ आतंकी घुसपैठ के लिए मौके की ताक में बैठे हैं। बावजूद इन सबके, अगर पाकिस्तान अपने रुख में निर्णायक बदलाव लाता है और वह ईमानदारी से उस पर अमल करता है तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में सुधार इस पूरे क्षेत्र में शांति और समृद्धि के एक नए दौर की शुरुआत साबित हो सकता है।

भारत और पाकिस्तान को मिला दें तो आबादी के लिहाज से यह दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। भारत के साथ सामान्य व्यापारिक संबंध रखने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कहीं अधिक फायदा हो सकता है, जो अभी बहुत मुश्किल दौर से गुजर रही है। बेशक, इससे भारतीय कंपनियों को भी एक आकर्षक बाजार मिलेगा। व्यापार बढ़ाने के लिए शांति जरूरी है। शांति और भरोसा हो तो कोई भी विवाद आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता है।

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