प्रॉडक्ट्स होंगे महंगे,तबेले के ताजे दूध पीने वाले को अब ज्यादा ढील करनी होगी जेब

मुंबई: तबेले के ताजे दूध(Milk) पीने वाले को अब अपनी जेब ज्यादा ढील करनी होगी। दूध के होलसेल रेट में ‘द बॉम्बे मिल्क प्रड्यूसर असोसिएशन’ ने साढ़े तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का निर्णय लिया है। असोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह का कहना है कि जानवर, चारा, दवाएं, मजदूरी और जानवरों के देखभाल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। महंगाई दर 10 से 12 प्रतिशत बढ़ी है, लेकिन हमने तो महज पांच प्रतिशत दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है। हमारी परेशानियों को लोग समझेंगे और निश्चित ही हमारा साथ देंगे।

जोगेश्वरी पश्चिम राम मंदिर स्थित पारसी वाला तबेले में ‘द बॉम्बे मिल्क प्रड्यूसर असोसिएशन’ के पदाधिकारियों की बैठक सीके सिंह के नेतृत्व में हुई। बैठक में दूध के होलसेल रेट में प्रति लीटर तीन रुपये और ट्रांसपोर्ट खर्च 50 पैसे बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले प्रति लीटर होलसेल रेट 70 रुपये और ट्रांसपोर्ट खर्च एक रुपये 50 पैसे था, जिसे बढ़ाकर 73 रुपये प्रति लीटर दूध और दो रुपये ट्रांसपोर्ट खर्च करने का निर्णय लिया गया है। दूध की नई दर 1 मार्च से 31 अगस्त, 2022 तक लागू होगा। पिछली बार दूध की 1 अप्रैल, 2021 को दो रुपये कीमत बढ़ाई गई थी।

तबेले के ताजे दूध की होलसेल कीमत साढ़े तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ाने से दूध से बनाई जाने वाले अन्य खाद्य व पेय पदार्थ सहित मिठाइयां महंगी हो जाएंगी। वैसे, मुंबई महानगर में आज रिटेल में प्रति लीटर ताजा दूध 72 से 80 रुपये में मिलता है। 1 मार्च से होलसेल रेट बढ़ाने के बाद अब इसमें 5 से 7 रुपये बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा है। दूध का कारोबार करने वाले राम बचन का कहना है कि जब हमें होलसेल में ही 75 रुपये में मिलेगा, तो दो-चार-पांच रुपये हमारा भी तो मेहनताना और कमाई बनती है, इसलिए हमें भी उसी अनुपात में रेट बढ़ाना होगा।

करीब 7 लाख लीटर ताजे दूध का उत्पादन
मुंबई महानगर में तबेले के ताजे दूध की मांग उत्पादन की तुलना में बहुत ज्यादा है। सीके सिंह का कहना है कि मुंबई महानगर में प्रतिदिन करीब 7 लाख लीटर के आसपास दूध की सप्लाई की जाती है। ताले दूध के उत्पादन में हर साल तेजी से गिरावट आ रही है। उसका दूध है कि लोग इस कारोबार से लोग दूर होते जा रहे हैं। दूध देने वाले जानवर लोग नहीं पालना चाहते। इस कारोबार को आगे बढ़ाने में सरकार को भी दिलचस्पी नहीं है। जानवर पालने का खर्च भी बढ़ रहा है, ऐसे में दूध के उत्पादन पर असर पड़ रहा है।

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