रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष ने जेवलिन, एनएलएडब्लू और स्टुग्ना-पी जैसे नामों को सुर्खियों में

वॉशिंगटन: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष ने जेवलिन, एनएलएडब्लू और स्टुग्ना-पी जैसे नामों को सुर्खियों में ला दिया है। ये तीनों यूक्रेनी सेना को दी जाने वाली एंटी टैंक मिसाइलें (Anti-Tank Missile) हैं। ये तीनों मिसाइलें यूक्रेनी सेना (Ukraine Army Missile) के लिए ब्रह्मास्त्र साबित हुई हैं। इनके ही दम पर यूक्रेन ने रूसी सेना के सैकड़ों टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को कबाड़ में बदल दिया है। यूक्रेन में जारी युद्ध ने दिखाया है कि एंटी टैंक मिसाइलें (FGM-148 Javelin) सिर्फ टैंकों को नष्ट करने के अलावा और भी बहुत कुछ कर सकती हैं। इस महीने की शुरुआत में ही यूक्रेन ने स्टुग्ना-पी मिसाइल (Indian Anti-Tank Guided Missile) से रूस के एक केए-52 हमलावर हेलीकॉप्टर को मार गिराने का वीडियो जारी किया था। यही कारण है कि भविष्य में होने वाले युद्धों में एंटी टैंक मिसाइलों की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ने वाली है। यूक्रेन के जंग में इन हथियारों के कारगर इस्तेमाल को देखते हुए भारतीय वायु सेना इजरायल से लंबी दूरी की एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम को खरीद रही है।

एमआई-17 हेलीकॉप्टर पर लगाई जाएगी स्पाइक एनएलओएस मिसाइल
द वीक की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली स्पाइक एनएलओएस एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल को रूसी मूल के एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टरों पर तैनात किया जाएगा। ये मिसाइलें लंबी दूरी से अपने लक्ष्य को बर्बाद करने में सक्षम हैं। ऐसे में संघर्ष के दौरान दुश्मन के फायरिंग रेंज में आए बिना एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टर स्पाइक एनएलओएस एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल को दुश्मनों के बख्तरबंद वाहन और टैंक पर दाग सकते हैं। स्पाइक नाम भारत के लिए अपरिचित नहीं है। यह इजरायल में बनी एंटी टैंक मिसाइलों की एक सीरीज है। इसमें अलग-अलग रेंज की कई वेरिएंट शामिल हैं। भारतीय सेना में स्पाइक के एक मैन पोर्टेबल वेरिएंट को पहले ही शामिल किया जा चुका है। यह वेरिएंट चार किलोमीटर दूर तक दुश्मनों के टैंक और बख्तरबंद वाहनों को निशाना बना सकता है।
स्पाइक एनएलओएस सबसे अडवांस मिसाइल
स्पाइक मिसाइल को बनाने वाली इजरायली कंपनी राफेल अडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स के मुताबिक दुनियाभर के 29 देशों ने इस सिस्टम के अलग-अलग वेरिएंट को खरीदा है। भारतीय वायु सेना इनमें से स्पाइक एनएलओएस वेरिएंट खरीद रही है। स्पाइक एनएलओएस स्पाइक फैमिली का सबसे अडवांस वेरिएंट है। इसमें एनएलओएस का अर्थ ‘नॉन लाइन ऑफ साइट’ होता है, जो इसकी लंबी दूरी तक मार करने वाली क्षमता को दर्शाता है। स्पाइक एनएलओएस मारक क्षमता लगभग 32 किलोमीटर है, जो अमेरिका की एजीएम-114 हेलफायर से लगभग चार गुना है, जिसे अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर पर तैनात किया गया है। ऐसी भी खबर है कि भारत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत स्पाइक एनएलओएस को अपने देश में ही बना सकता है।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की तैयारी में भारत
स्पाइक एनएलओएस एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल को इस समय सीमित संख्या में ऑर्डर किया गया है। बाद में मेक इन इंडिया के तहत इस मिसाइल का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है। हवा से फायर होने वाले स्पाइक एनएलओएस जैमिंग और बाकी गतिरोध को खुद ब खुद दूर कर दुश्मनों के जमीनी ठिकानों, उनके टैंक रेजीमेंट और आर्मर्ड व्हीकल को निशाना बना सकता है। इससे दुश्मन के टैंको की आगे बढ़ने की गति भी काफी हद तक धीमी हो सकती है।

स्पाइक एनएलओएस मिसाइल की ताकत जानें

अधिकतम रेंज 32 किलोमीटर
कुल वजन 70 किलोग्राम
लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म हेलीकॉप्टर
खरीदने वाले देश अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, भारत
एनएलओएस के वेरिएंट 3 ( एमके.2, एमके.4, एमके.5)
युद्ध में इस्तेमाल इराक, अफगानिस्तान, आर्मीनिया

भारत ने स्पाइक को क्यों चुना?
भारत लंबे समय से एयर लॉन्च एंटी टैंक मिसाइलों की खरीद करना चाहता था। 2011 में भारत के पास दो विकल्प थे। इनमें से पहली अमेरिका में बना FGM-148 जेवलिन मिसाइल और दूसरी स्पाइक एनएलओएस थी। भारत ने स्पाइक को इसलिए चुना गया क्योंकि इजरायल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मिसाइलों का घरेलू निर्माण करने के लिए तैयार था, जो मोदी सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देता है। इन मिसाइलों की एकमुश्त खरीद के बजाय, भारत ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए इजरायल के साथ बातचीत की ताकि भारत में मिसाइलों का उत्पादन किया जा सके। इजरायली कंपनी ने भारत में कल्याणी के साथ मिलकर कल्याणी राफेल एडवांस्ड सिस्टम्स (केआरएएस) नाम के ज्वाइंट वेंचर को स्थापित किया है। ऐसे में इस मिसाइल का निर्माण आसानी से भारत में किया जा सकता है।
अमेरिका की जेवलिन मिसाइल कितनी खतरनाक
जेवलिन मिसाइल दुनिया की सबसे आधुनिक टैंक को भी नष्ट करने में सक्षम है। यह मिसाइल दो बार में अपने टारगेट को ध्वस्त करती है। पहली बार में मिसाइल टैंक के संपर्क में आते ही ब्लास्ट हो जाती है, जिसके बाद यह और अधिक शक्ति के साथ कवच को भेदने का काम करती है। जेवलिन मिसाइल किसी आर्मर्ड व्हीकल, टैंक और बंकरों को उड़ाने में सक्षम होती है। इससे किसी कम ऊंचाई पर उड़ने वाले एयरक्राफ्ट, जैसे-हेलीकॉप्टर, को भी निशाना बनाया जा सकता है। जेवलिन मिसाइलें ‘मैन पोर्टेबल’ हैं, जिन्हें यूक्रेनी सैनिक कंधों पर रखकर फायर कर सकते हैं। जबकि अन्य एंटी-टैंक सिस्टम को इस्तेमाल करने के लिए ट्राइपॉड की जरूरत पड़ती है।

1996 से इस्तेमाल कर रहा अमेरिका
जेवलिन मिसाइल को अमेरिका 1996 से ही इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिकी सेना इस मिसाइल को अफगानिस्तान युद्ध, इराक युद्ध, सीरिया युद्ध और लीबिया युद्ध में इस्तेमाल कर चुकी है। यह मिसाइल अपने इंफ्रारेड गाइडेंस सिस्टम से दुश्मन का पीछा करती है। इससे मिसाइल को फायर करने के बाद सैनिक के पास छिपने के लिए समय मिल जाता है। अमेरिकी सेना जनवरी 2019 तक 5000 से अधिक जेवलिन मिसाइलों को फायर कर चुकी है। इसकी प्रभावी रेंज 2500 मीटर तक बताई जाती है। इसके बाद यह मिसाइल गुरुत्वाकर्षण के कारण जमीन की तरफ गिरने लगती है।

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