ताड़ाबहाल में मनरेगा योजना की गुणवत्ता की खुली पोल,कुआं धंसकर हुई जमींदोज, ग्रामीणों ने जांच का किया मांग

करमाटांड़ में मनरेगा योजना की लगातार लापरवाही लूट का मामला प्रकाश में आ रहा है जिसको जीवंत करता इसी हफ्ते की घटना है बीते गुरुवार तालाबहाल पंचायत के बीच नीजकजरा गांव में अमर महतों के कुए के निर्माण का 2 वर्ष पूर्ण हुये भी नहीं और कुआ धंस कर जमीनदोज हो गया । यह कुआं 2 लाख 81 हजार रुपये कि सरकारी राशि से बनाई गई थी। योजना कोड संख्या if 6876 है। यही नहीं इसके पूर्व इसी नीजकजरा गांव के दिवाकर महतों के 2 वर्ष पूर्व भी कुआं इसी प्रकार पूर्ण होते हैं धंस गया था। 2 वर्षों के अंतराल में दो कुआं का धंस जाना पंचायत में संचालित मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहा है। समान्य रूप से बनने वाले कुआं की औसत आयु भी 50 वर्ष से अधिक होती है परंतु सरकार द्वारा बनाए जा रहे कुआं असमय गिर जा रहे हैं ऐसे में लोगों को सरकारी कुआं में जाने में ही डर लग रहा है। क्योंकि गुरुवार को नीजकजरा गांव कुआं धंसने के साथ कुआं में लगे सिंचाई पंप भी मलवा में दब गया जिससे बगल खेतों में लगे गेहूं, टमाटर आदि फसलों का पटवन में समस्या उत्पन्न हो गई हो रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कुए की घटिया निर्माण की जांच की जाए साथ ही कि कुआं का पुनः निर्माण कराया जाएगा या वहां के गड्ढे को भर दिया जाए ताकि क्षेत्र की जान माल की होने वाली हानि को रोका जा सके।
लाभुक दिवाकर महतो ने बताया कि मेरा कुआं धंस के बाद में पुन: उसका निर्माण कर रहा हूं परंतु अनियमितता के कारण आज पुनः अमर महतों का कुआं धंस गया है।

  1. निगरानी के अभाव में करमाटांड़ में योजनाओं में घटिया सामग्री का हो रहा है उपयोग, पदाधिकारियों की मौन सहमति सामिल

करमाटांड प्रखंड क्षेत्र के ताडाबहाल पंचायत में संचालित योजनाओं का प्रशासनिक निगरानी के अभाव से घटिया निर्माण कार्य बड़े ही खुलेआम कर रहे हैं। ग्राम पंचायत ताडाबहाल के लाभुक हारुन अंसारी का मनरेगा के तहत बन रहे कुआं मे कच्ची ईट का उपयोग किया जा रहा है आपूर्ति करने वाले भेंडर द्वारा कच्ची ईंट आपूर्ति कर किए गए हैं और उसी कच्ची ईट, लोकल मोटी बालु, सीमेंट की कम मात्रा से कुआं का निर्माण कराया गया । कुछ पैसे की बचत करने में लाखों रुपए के सरकारी राशि का दुरुपयोग हो रही है। घटिया सामग्री का उपयोग कर कुछ पैसे तो बचते हैं परंतु पूरी योजना और पूरी राशि का दुरुपयोग हो जाता है ।यही कारण है कि असमय कुआं धंस जाते हैंः हारून की तरह प्रखंड क्षेत्र में कई कुआं कच्ची ईंटों से निर्माण किए गए हैं एवं आज भी किए जा रहे हैं। हारून मियां के कुआं का समाग्री सप्लाई भेंडर मुकेश मंडल द्वारा किया गया जिसमें योजना संख्या IF/6522 में सामग्री का दो भोउचर से लगभग डेढ़ लाख की निकासी की गई। जिसमें भोउचर संख्या 58 में 99 हजार एवं भोउचर संख्या 137 में 48 हजार की निकासी की गई है। ईट भट्टों से कच्चे एवं काले ईट की खरीद कर भेंडर द्वारा पैसे की मोटी बचत की जा रही है। इसमें निगरानी करने वाले पदाधिकारी भी स्वार्थ पूर्ति के लिए सहयोग करते हैं। निर्माण एवं आपूर्तिकर्ता ऐसे योजनाओं से अपना भविष्य बनाकर कुआं के उद्देश्य, लाभ का भविष्य खराब कर देते हैं निगरानी में रोजगार सेवक,कनीय अभियंता, पंचायत सचिव, प्रखंड विकास पदाधिकारी के समेत आला अधिकारी भी इनके सक्षम निगरानी पदाधिकारी होते हैं।इनके देखरेख एवं सही मार्गदर्शन के अभाव में योजना की गुणवत्ता न्यूनतम स्तर पर की जाती है एसे मे योजनाओं से संबंधित पदाधिकारियों पर अनदेखी लापरवाही मिलीभगत भी माना जा सकती है। लाभुक के पुत्र जमरुदीनअंसारी ने कुआं में गले एवं काले इंट लगाने एवं घटिया कार्य करने का आरोप लगाते हुए सुधार करने की मांग की है ।

  1. करमाटांड़ मे मनरेगा में व्यापक लूट, तेतुलबंधा मे सूचना बोर्ड बना नहीं निकाल ली दो बार राशी, बिना सामग्री आपूर्ति के भेंडर को किया पेमेंट, तो कहीं अधूरे योजना को पूर्ण दिखा किया बंद

करमाटांड़ के तेतुलबंधा पंचायत मे भी शिकरपोसनी पंचायत की तरह मनरेगा में व्यापक लूट का मामला सामने आ रहा है जिसमें मनरेगा एक्ट की धज्जियां उड़ाते दिख रही है योजना स्थल पर बोर्ड नहीं दिखाई दिया परंतु वर्ष 2019 एवं 2020 में अलग-अलग भोउचर जमाकर एक ही भेंडर द्वारा दो बार पैसे की निकासी की गई है। वही कई कुआं कागजी रूप से पूर्ण होने तथा पूरा पैसा निकासी होने के बावजूद भी धरातल पर अधूरी है। तो कहीं खुदाई पूर्ण भी नहीं हुई है और भेंडर के माध्यम से लाखों रुपये की अवैध निकासी कर ली गई है।
तेतुलबंधा पंचायत के धरूवाडीह मे लाभुक कारू तुरी के नाम पर बनाए जा रहे कुएं में का पूरा भुगतान होने के उपरांत भी अंतिम रूप में बाकी है वही योजना स्थल पर बोर्ड नहीं है परंतु बोर्ड कि दो बार राशि निकाली गई है जो वर्ष 2019 में एस के इंटरप्राइजेज के द्वारा बील संख्या 229 दिनांक 30 अगस्त एवं 25 अप्रैल 2020 को इसी सप्लाईर के द्वारा दुसरा अलग बील संख्या 657 के माध्यम से बोर्ड की दूसरी बार राशि निकासी कर ली गई। हालांकि ग्रामीण गणेश मंडल ने बताया कि बोर्ड बना था परंतु बाद में ईट का उपयोग कुंआं निर्माण में ही कर दिया गया है। योजना से संबंधित रोजगार सेवक, पंचायत सचिव, मुखिया, भेंडर एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी 2 वर्षों से एक ही है फिर भी अलग-अलग भोउचर से एक ही सामग्री का दो बार निकासी करना सभी की मिलीभगत का प्रतीत हो रहा है। जो मनरेगा एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में आती है। परंतु प्रशासनिक लापरवाही के कारण ऐसी गलतियों को भी दरकिनार कर देते हैं जिस कारण इस तरह की लूट का मामला क्षेत्र में बढ़ रहा है। अगर मामला को गंभीरता पूर्वक देखा जाय और जांच की जाए तो करमाटांड में कई योजनाओं में भी इस तरह की निकासी का मामला प्रकाश मे आ सकता है।
इसी पंचायत के चारघारा मे लाभुक रुपी मूर्मू का कुआं का खुदाई अंतिम चरण में है परंतु योजना स्थल पर कोई भी सामग्री की आपूर्ति नहीं की गई है फिर भी 1 लाख रुपए की निकासी की गई है। वही चारघारा के लखिंदर सोरेन, दशरथपुर के अनाउल अंसारी, तेतुलबंधा के लक्ष्मण डोम, समेत दर्जनों ऐसे हैं जो धरातल पर पूर्ण नहीं है परंतु कार्य से अधिक कैसे निकासी किया गया है लाभुकों को कुआं जैसे संपत्ति बनने का हवाला देते हुए लाभुकों से हजारों हजार की राशि योजना मे लगावाये गये हैं।

  1. शिकरपोसनी मे 40×40 के पुराने डोभा को परिवर्तित कर 60×60 का डोभा बना कर पैसे लूटने का प्रयास, विरोध पर रुका काम
    करमाटांड़ प्रखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत शिकरपोसनी के चरकीपहाड़ी रोड के समीप एक ही जगह पर आधे दर्जन डोभा का निर्माण मनरेगा के द्वारा किया गया। खासकर कारण यह है कि वहां ईंट भट्टे का निर्माण किया जाता है जिसमें खपत होने वाले मिट्टी से बने गड्ढे को आसानी से डोभा में तब्दील कर सके। इसमें मेहनत और मजदूरी दोनों का बचत होता है। हालांकि डोभा निर्माण के प्राक्कलन में अंकित मजदूरी मास्टर रोल के आधार पर मजदूरों के बैंक खाते में ही जाता है। चरकीपहाड़ी रोड के समीप शिकरपोशनी में एक तो गड्ढे को डोभा के नाम पर लूट उसके बाद पूर्व से निर्मित 40×40 पुराने डोभा दो तरफ 20-20 फिट डोभा को बढ़ाकर निर्माण किया जा रहा था जिसका पूर्ण होते हैं 40 की मेड को दो तरफ से काटकर मिलाने के बाद 60×60 की नई डोभा दिखाकर पूरे पैसे निकालने की मंशा थी। डोभा को 60×60 का डोभा में परिवर्तित कर रहा था जिसकी जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने लूट की आशंका देखाते हुए विरोध किया और संबंधित पदाधिकारियों को सूचना दिया जिस कारण योजना वहीं पर रोक दी गई है। इस तरह के फर्जीवाड़ा करते देखे जाने के बाद संभावना जताया जा रहा है कि इस तरह पूर्व में भी कई पुराने डोभा को अपग्रेड कर नए डोभा बनाकर पैसे की निकासी की गई होगी। अगर पंचायत के डोभा की गिनती की जाए तो एक बड़े धपला का पर्दाफाश हो सकता है
  2. शिकरपोसनी मे कुआं बना नहीं और लाभुक व भेंडर ने निकाल ली राशि, पदाधिकारी मौन

किसी भी योजना को धरातल पर लाने के लिए लाभुकों की सक्रियता और पदाधिकारियों की गंभीरता सबसे महत्वपूर्ण होती है परंतु करमाटांड़ क्षेत्र में लाभुकों की निष्क्रियता एवं पदाधिकारियों की संवेदनहीनता के कारण योजनाओं की राशि बंदरबांट की हो रही है जिसका लगातार क्षेत्र में संचालित योजनाओं में गड़बड़ी का मिलना साबित कर रहा है इसी प्रकार करमाटांड़ प्रखंड के ग्राम पंचायत शिकरपोसनी का एक मामला प्रकाश में आया है।
मनरेगा योजना अंतर्गत कविता देवी की जमीन में सिंचाई कुआं बनाया जाना था. यह योजना 2018-19 में स्वीकृत हुआ था. लेकिन कुएं की खुदाई पूरी भी नहीं हुई और प्राक्कलित राशि से सामग्री खरीदने की राशि लगभग दो वर्ष पूर्व ही निकाल ली गई.राशि की निकासी के के बावजूद कुआं नहीं बन सका है. इस योजना में कुल 105000 रुपए की निकासी कर ली गई है. इसमें मानव दिवस के रूप में 34272 रुपए की निकासी की गई है. जबकि सामग्री के ऐवज में 71227 रुपए की निकासी की गई है. पैसे तो निकाल लिये गये हैं, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ है.
योजना संख्या-IF/ 4595 हैं। जिससे बिना खुदाई के मजदूरी के नाम पर ₹34272रुपये की निकासी की गई है जिसमें 10 जनवरी 2019 को मास्टर रोल संख्या 23570 में ₹6048 एवं मास्टर रोल संख्या 23571 में ₹8064 एवं 3 मार्च 2019 को मास्टर रोल संख्या 28140 में ₹10080 एवं मास्टर रोल संख्या 28142 में उसी तिथि को ₹10080 की निकासी की गई है। निकाली गई मजदूरी देखा जाए तो एक हफ्ते में प्रतिदिन 20 मजदुरों की हाजरी दिखाई गई है।

वहीं समाग्री के नाम पर मुकेश कुमार भेंडर के बील संख्या 583 के द्वारा ₹71227 रुपये की निकासी 2019 मे की गई है। जिसमें उल्लेख है कि 12हजार ईंट एवं 40 बैग सीमेंट समेत चिप्स एवं बालु की आपूर्ति की गई है इससे साफ पता चलता है कि जब कुआं की खुदाई ही नहीं हुई है तो कुआं की जोड़ाई की सामग्री की निकासी कर राशि की गबन किया गया है।
इस गबन में नियमानुसार मुख्य रूप से ग्राम रोजगार सेवक पंचायत सेवक एवं मुखिया की संयुक्त हस्ताक्षर पर मास्टर रोल एवं सामग्री आपूर्ति की भेंडर द्वारा समर्पित बील पर संयुक्त हस्ताक्षर होते हैं उसके उपरांत प्रखंड विकास पदाधिकारी की डिजिटल सिग्नेटरी के बाद ही पेमेंट होने की प्रक्रिया है अगर इस योजना से संबंधित दस्तावेजों को खंगाला जाए तो कहां से गबन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई है इसका पर्दाफाश होगी
अभी तक मजदूरी एवं समाग्री के नाम पर लगभग ₹105000 की राशि निकाली गई है परंतु वास्तविकता देखे तो ना ही कुआं 10 फीट तक खोदे गई है और ना ही पूरी सामग्री गिराई गई है। लाखों रुपया निकासी होने के बावजूद भी न ही कुआं का उद्देश्य पूरा हो सका है और ना ही सरकार द्वारा निकाली गई राशि का सदुपयोग हुआ।

इस मामले पर रोजगार सेवक विवेकानंद से पूछे जाने पर कुछ भी बताने से इनकार किया। वहीं पंचायत सचिव कृष्णा मंडल से जब पूछा गया तो वे ऑफ द रिकॉर्ड बोलने को तैयार हुए. उन्होंने कहा कि वह पुरानी एस्टीमेट की योजना है. नई एस्टीमेट में कन्वर्ट होने के बाद कार्य प्रारंभ किया जाएगा. वहीं खर्चे से ज्यादा निकासी के सवाल पर कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. ऐसे में इस लापरवाही पर विभागीय पदाधिकारियों एवं कर्मियों पर सवाल उठ रहा है. इस मामले पर पदिधिकारियों को संवेदनशील होने की जरूरत है ताकि पैसे का सदुपयोग हो सके.

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