चुनावी मौसम में सिद्धू के रास्ते पर क्यों चल पड़े अखिलेश

नई दिल्ली :   पिछले वर्ष जिन्ना के लिए कहा था कि उन्होंने हमें आजादी दिलाई। अखिलेश का यह अवतार देख लगता है जैसे उनमें पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की आत्मा घुस गई हो। याद है ना, सिद्धू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की शान में कौन-कौन से कशीदे पढ़ चुके हैं? और कशीदे ही क्यों, वो तो पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के गले भी लग चुके हैं।

बहरहाल, अखिलेश के ताजा बयान को सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तुरंत लपक लिया। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने तुरंत ट्वीट कर अखिलेश को जिन्ना और पाकिस्तान प्रेमी बता दिया। उन्होंने लिखा, ‘जो जिन्ना से करे प्यार, वो पाकिस्तान से कैसे करे इनकार!’

गांधी, पटेल, नेहरू से जिन्ना की तुलना
जैसा ऊपर बताया जा चुका है कि उन्होंने पाकिस्तान को क्लिन चिट देने से पहले जिन्ना की सरदार वल्लभ भाई पटेल और महात्मा गांधी से बराबरी कर चुके हैं। पिछले वर्ष 31 अक्टूबर को पटेल जयंती के अवसर पर हरदोई में अखिलेश ने कहा था, ‘सरदार पटेल जी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, जिन्ना एक ही संस्था में पढ़ करके बैरिस्टर बनकर आए थे। एक ही जगह पर पढ़ाई-लिखाई की उन्होंने। वो बैरिस्टर बनाए। उन्होंने आजादी दिलाई।’


सिद्धू की राह पर अखिलेश

अब जरा सिद्धू को याद कर लें। सिद्धू पाकिस्तान की धरती पर जाकर जीवे-जीवे पाकिस्तान का नारा लगा चुके हैं। साल 2018 में सिद्धू इस्लामाबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। समारोह के दौरान वह पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से गले मिले। मिलन की यह तस्वीर सामने आते ही देश में सिद्धू के खिलाफ आक्रोश की लहर दौड़ पड़ी थी। लेकिन सिद्धू तो सिद्धू हैं, वो कहां मानने वाले। वो अपने स्टैंड पर कायम रहे और पिछले वर्ष 2021 में फिर से पाकिस्तान गए तो वहां के अधिकारियों से कहा- इमरान मेरा बड़ा भाई है, उसने मुझे बहुत प्यार दिया है। सिद्धू 2018 के दौरे में कह चुके थे- ‘हिंदुस्तान जीवे, पाकिस्तान जीवे!’ इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सिद्धू को पाक अधिकृत कश्मीर (POK) के राष्ट्रपति मसूद खान के पास भी बिठाया गया था।
अखिलेश के लिए सिद्धू के अलग परिस्थिति

सिद्धू अड़ियल हैं, इतना कि चुनाव का भी फिक्र नहीं करते। पंजाब में अपने ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया तो आलाकमान ने सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी। कैप्टन की भी मुख्यमंत्री पद से छुट्टी हो गई और जब चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया तो सिद्धू उन्हें भी निशाना बनाने लगे। ये सिद्धू हैं जो चुनाव जैसे अहम मौके पर अपने घर को ही सुलगा सकते हैं, फिर जब बात विरोधी बीजेपी और उसके सर्वोच्च नेता नरेंद्र मोदी को ‘जलाना’ हो तो फिर वो कहां मानने वाले। अपनी पार्टी के अंदर के विरोधी हों या फिर दूसरी पार्टियों के… सिद्धू का हर हमला दिल्ली में पार्टी आलाकमान के लिए भी मुश्किल बना है, अखिलेश तो खुद अपनी पार्टी के आलाकमान हैं।

नुकसान से ज्यादा फायदे की गारंटी!
ऐसे में सवाल उठता है कि अखिलेश ने अड़ियल सिद्धू की राह क्यों पकड़ रखी है? मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के संस्थापक थे। उस पाकिस्तान के जिसका जन्म ही भारत विरोध की जमीन पर हुआ है। ऐसे में अगर कोई जिन्ना और पाकिस्तान के लिए सॉफ्ट कॉर्नर दिखाए तो दो बातें हो सकती हैं- या तो वो किसी को दिल जीतना चाहता है या फिर उसके दिल में जिन्ना और पाकिस्तान बसते हैं। निश्चित तौर पर अखिलेश यादव दूसरी कैटिगरी में नहीं आते हैं। उन्हें पहली कैटिगरी में आने वाले मतदाताओं को रिझाने की कोशिश में जिन्ना को ‘देश का उद्धारक’ बताना पड़ा था। तो क्या अखिलेश के समर्थकों में वैसे लोग भी हैं जिनके दिलों में जिन्ना और उनका पाकिस्तान बसते हैं? इसका जवाब भी एक सवाल से ही दिया जा सकता है कि क्या अखिलेश उन मतदाताओं को अपने से दूर रखना चाहते हैं जिन्हें जिन्ना और पाकिस्तान से चिढ़ है? यह तो स्वाभाविक है कि जब एक तरफ से नुकसान की गारंटी हो तो कोई भी नेता दूसरी तरफ से बड़े फायदे की गारंटी के बिना कोई चाल नहीं चलता।
20% वोट पर नजर

अखिलेश यादव 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में एमवाई समीकरण से यूपी की सत्ता का सिंहासन पा चुके हैं। प्रदेश में मुसलमानों की आबादी करीब 20% है। इसमें कोई शक नहीं कि इस आबादी का एक हिस्सा ऐसा है जिसके लिए जिन्ना-पाकिस्तान करना पड़ता है। वह हिस्सा कितना बड़ा या कितना छोटा है, यह आंक पाना तो कठिन है। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि बाकी हिस्सा भी जिन्ना-पाकिस्तान के राग से भले ही खुश न होता हो, लेकिन नाराज तो शायद ही होता होगा। 
बीजेपी नेता और योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने पिछले वर्ष कहा था कि मुस्लिम वोटों के लिए अखिलेश जिन्ना क्या, ओसामा बिन लादेन को भी अपना आदर्श बता सकते हैं। अब पाकिस्तान दुश्मन नंबर एक नहीं वाले बयान पर खुद सीएम योगी ने ट्वीट किया, ‘जिन्हें पाकिस्तान दुश्मन नहीं लगता, जिन्ना दोस्त लगता है। उनकी शिक्षा-दीक्षा और दृष्टि पर क्या ही कहा जाए। वे स्वयं को समाजवादी कहते हैं, लेकिन सत्य यही है कि इनके नस-नस में ‘तमंचावाद’ दौड़ रहा है।’

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